Siddh Vashikaran Mantra Sadhana

साधना से साधक का चंचल मन एकाग्र होकर प्रेममय हो जाता है। साधना उस पारस के समान है जो मानव मन रूपी लोहे को सोना बना देती है। अगर हम साधना करें और किसी योग्य गुरु के समीप रहें तो हमारे भीतर अच्छे संस्कार होंगे। मंत्र साधनामय होकर ही सिद्ध हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई घड़ी अशुभ नहीं होती। अगर हम साधना को किसी भी घड़ी में विवेक, लग्न एवं परिश्रम के साथ करें तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है। किसी कार्य में असफल होने पर समय को अशुभ कह देना उचित नहीं है। इसके अलावा जब तक हम गुरुमय नहीं होंगे, तब तक साधना नहीं कर सकेंगे।

यह संसार कर्म क्षेत्र है। यहां जन्म से लेकर मरण तक सभी काम कमी के फलस्वरूप ही संपन्न होते हैं। सुख-दुख, अमीरी-गरीबी, यश- अपयश, विद्या तथा सांसारिक वस्तुएं आदि सब कर्माधीन हैं। कर्मो का हमारे जीवन में सर्वाधिक महत्व है। इस जन्म और आगामी जन्मों में भी हमें अपने कर्मो का फल भोगना है। इसलिए सोच-समझकर एवं सावधानीपूर्वक वही कर्म करने चाहिए जैसा हम आगामी जीवन प्राप्त करना चाहते हैं। एक प्रकार से हमारा भूत, वर्तमान और भविष्य हमारे कर्मों पर आधारित है। इसी से आप कर्मो के महत्व का अनुमान लगा सकते हैं। योगियों, साधकों और संतों ने कमी की शक्ति, सर्वव्यापकता एवं महत्व के संबंध में मार्गदर्शन किया है। इस विषय में ‘ऋग्वेद’ कहता है-
एष धिया यात्यण्व्या शूरो रथेभि।
आशुभिः गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतत्।।

वशीकरण मंत्र साधना (वशीकरण मंत्र विद्या)

वशीकरण, आकर्षण एवं सम्मोहन एक जटिल क्रिया है। इसके लिए लग्न, परिश्रम, एकाग्रता और सही गुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। वशीकरण जितनी जटिल क्रिया है, तंत्र साधना के माध्यम से उतनी ही सरल हो जाती है। वशीकरण, सम्मोहन एवं आकर्षण के लिए स्वयं प्रयत्न करें। वशीकरण सूक्ष्म तरंगों पर आधारित क्रिया है। इसके प्रभावी होने पर साधक के भीतर-बाहर जिस प्रकार का परिवर्तन होता है, उसी प्रकार तंत्र में तांत्रिक साधना के मध्य पदार्थो, आकृतियों और मंत्रों के कारण साधक की विचार शक्ति की तरंगें अधिक तीव्र एवं अधिक शक्ति के साथ प्रसारित होती हैं।

तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए वस्तुओं के प्रयोग की बातें आदिकाल से चली आ रही हैं। ये प्रयोग हमारे जीवन में इस तरह से रच-बस गए हैं कि प्राय: सभी के लिए स्वीकार्य हो गया है। विभिन्न पूजा-पाठों के मध्य भी तांत्रिकों का विशिष्ट पर्व होता है। पूजा या किसी अन्य अनुष्ठान के लिए दीवारों पर बनाई गई आकृतियां तांत्रिक गणित का ही फलादेश हैं। साधक की शक्ति ही तांत्रिक अनुष्ठानों की सफल बनाती है। इसके लिए किए जाने वाले प्रयोग चाहे मांत्रिक हों, तांत्रिक हों या यांत्रिक हों-इन सभी की सफलता साधक की निर्मलता पर निर्भर करती है। मंत्र को शक्ति का रूप माना जाता है। ॐ उसका मूर्तरूप है। विराट शक्ति के किसी भी रूप से संबंधित मंत्र का उच्चारण करने से शक्ति उत्पन्न होती है। यह शक्ति साधक के शरीर में विद्युत के रूप में पहुंच जाती है। हमारे ऋषि-महर्षियों ने प्राचीन काल में हजारों मंत्रों की रचना की। उन्होंने मंत्र जप के प्रभावों को जाना और कष्टों को दूर करने का उपाय बताया। मंत्रों का प्रभाव आज भी यथावत है और इससे सभी प्रकार के अनिष्टों से बचा जा सकता है। आवश्यकता है- आपके विश्वास और श्रद्धा की। विश्वास, श्रद्धा और विधि-विधान द्वारा किए गए मंत्र जप से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण संभव है।

शक्तिशाली शाबर मंत्र वशीकरण साधना

वशीकरण एक प्रकार से सम्मोहन का ही परिष्कृत रूप है। सम्मोहन में एक क्रिया द्वारा व्यक्ति किसी को अपने संकेतों पर चलाता है। हम जो भी देखते या सुनते हैं, उसका हमारे मन-मस्तिष्क पर तत्काल प्रभाव होता है। आपने कोई हृदय विदारक दुर्घटना देखी तथा आपके दिल और दिमाग पर सीधा प्रभाव हो गया। आप लाख प्रयत्न करने पर भी उसे नहीं भूल सकते। आपको किसी ने अपशब्द कहे, आपने सुने। तत्काल आपका चेहरा लाल हो उठेगा, आपका खून खौल जाएगा। आप गुस्से से भर जाएंगे। उस समय आप अपने पर काबू नहीं रख सकते। आप सब कुछ कर गुजरने के लिए तैयार हो जाएंगे। यह स्वाभाविक क्रियाएं कहलाती हैं। आदमी का वश इन पर नहीं चलता। जब आदमी का वश नहीं चलता और जिससे वह वशीभूत होता है तो वह ‘वशीकरण’ कहलाता है।